Vaibhav Aurat Ka

केरेला के कन्नूर शहर में एक होस्पिटल के रूम में एक महिला की दर्द से कराहने की आवाज आ रही थी | जलने के कारण उसकी गर्दन और अन्य जगहों पर जख्म दिख रहे थे उसका नाम रेखा था | रेखा की आँखों के आँसू उसकी वेदना बता रहे थे , उसे अपना बीता हुआ वक्त याद आने लगा ……………
रेखा को अपने माता पिता का चेहरा तक याद नही था जब वो एक एक्सिडेंट में चल बसे थे इतनी छोटी उमर में उसने उन्हें खो दीया था जब उसे ख़ुद का नाम तक नही याद था | सगे सम्बंधी कोई भी उसे साथ नही ले गया तब एक बुजुर्ग उसे अपने साथ ले गए अब यहि रेखा के नए पापा थे , जेसे तेसे रेखा रहने लगी उनके साथ | एक स्कूल में उसे डाला तो था नए पापा ने पर फीस और युनिफोर्म के पैसे पूरे ना होने के कारण जल्दी ही उसे वहा से निकाल दिया गया था | पड्ने लिखने कि ख्वाहीश होते हुए भी रेखा को उन्हें मार के रहना पडा , रेखा का ये वक्त ऐसा था जब बच्चे अपने माता पिता के साथ एक कोमल फुल कि तरह खिल रहे होते हे उनके प्यार से ,एक बचपन ही हमारे जीवन का ऐसा वक्त होता हे जो पूरे जीवन हमे सुखद यादे दिलाता है | लेकिन रेखा के पास ऐसा बचपन नही था ……थोड़ी बडी होते होते उसे घर का काम करने की और अपनी इछाओ को मारने कि आदत हो गई थी |                                                                            थोड़े वक्त बाद उसके पापा ने उसको एक दूर के पहाचान वालो के यहा भेज दिया ताकि उसके खाने पीने की और अन्य खर्चो कि चिंता दूर हो जाए | मुश्किल से रेखा वहाँ मन लगाने लगी प्यार और विश्वास तो उसे वहा भी ना मिला फिर भी अब रेखा वहा रह के बडी होने लगी कुछ ही सालो में वह अब जवान हो गई थी | फिर उसे महसुस होने लगा की उस घर के अंकल की नजर उस पर खराब होने लगी थी , रेखा इस कदर मायुस हो गई थी कि आत्म्हत्या करने का ख्याल उसे आने लगा और एक दिन वो उस घर से भाग गई , वापस पापा के घर | इस हाद्से के बाद उसकी शादी की बाते होने लगी थी क्युकि घर के काम काज में तो वह पर्फेक्ट थी ही दिखने में भी सुंदर थी | शादी के समय उसके पापा और इस परिवार ने जहाँ वह पली बडी थी ना तो रेखा से उसकी पसंद पुछि ना ही उसकी हा ना , फिर एक आदमी से उसकी शादी करा दी गयी जिसको देखा तक नही था रेखा ने |
फिर भी रेखा ने दिल में सोचा कि अब आगे प्यार भरा जीवन होगा , अब वो अपनी मर्जी से अपनी खुशी से भी जी पायेगी और खुले आसमान में आजाद पंछी कि तरह उड पायेगी ……….| अपने सारे सपनो को साथ लेकर रेखा शादी करके ससुराल आयी एक महिना तो पंख लगाते उड गया जैसे ……कि अचानक एक दिन उसके पति ने खाना देर से बनने कि वजह से उसे इतना मारा कि वह शरीर से जयादा दिल से जख्मी हो गयी ……अभी पूराने दर्द के जख्म भरे भी नही थे और ये नए जख्मो ने उसे क्या उसकी आत्मा को भी रूला दिया क्युकि अब ये मार झूड उसकेपति कि आदत बन चुकी थी शराब के साथ साथ |
एसे ही रोते बिलखते रेखा एक बच्चे की माँ भी बन चूकि थी अब बेटा 8 साल का था और पिछली रात ही उसके पति ने उसे केरोसीन डाल के जलाया था और वो होस्पिटल में दर्द से कराह रही थी……..सोच रही थी क्या पाया क्या खोया , क्या चाहा और क्या जिया ….कहते है किसी भी बात की अतीश्योक्ति अच्छि नही होती ये रेखा की सहन शक्ति से परे हो गया था, या यही वक्त था जो उसके पूरे जीवन को बदल रहा था |
उस वक्त उसके पति ने पेसे दे कर केस भी नही होने दिया जलाने का , होस्पितटल से घर आके 5-7 दिन हुए थे रेखा को तब उसके मन कि अन्दर की शक्ति ने उसे हिम्मत दी और उसी दिन रेखा पति के गाली बोलने पर और फीर से पति के मारने पर पति को एक डंडे से मार कर अपने बच्चे को लेकर अहमदाबाद के निकल पड़ी एक अनजान हिम्मत उसे खीच ले गयी एक नए आशा के साथ कि अब कम से कम मार खा के नही जीना है |
अहमदबाद आते ही उसने सोचा ख़ुद मेह्नत करके कमा लेगी और एक बेहतर जीवन ख़ुद का सहारा ख़ुद बन के जियेगी कहते है जहा चाह वहा राह हिम्मत करके उसने एक रूम किराये पे लिया सोने कि चूडि बेच के और दिन रात एक करके एक फेक्ट्रि में सिलने का काम चालु कर लिया | इतना आसान भी नही था फिर भी हिम्मत करके उसने उन्ही पेसो से बेटे को पडाया और ख़ुद ब्यूटीपार्लर का काम सिख लिया |
जब इंसान ख़ुद अपनी कदर करता है और ख़ुद हिम्मत करता है तो इश्वर भी उसका साथ देते ही है …मेहनत रंग लाई अब रेखा इतना कमाने लगी थी कि ख़ुद का लोन भर के घर खरीद लिया था|
रेखा ने जिस बेटे के लिए अपना जीवन पुरा लगा दिया था ना ही दूसरी शादी कि थी उसने बेटे के लिए अब उसी बेटे कि शादी भी बडे उत्साह से की रेखा ने | पर शायद अभी उसकी लडाई खत्म नही हुई थी , उसकी बहु एक ही महिने में झगड के चली गयी और बेटा भी अब उसका साथ नही दे रहा था ना ख़ुद की जवाबदारी ले रहा था | शुरू से आख़िर तक रेखा ने ख़ुद को अकेला ही पाया पर एक एसी अटुट श्रद्धा है उसको ईश्वर में और ख़ुद पर यकीन भी की अब भी वो हीम्मत हारे बीना रोज़ सुबह काम पे निकल जाती हे नई आशओ के साथ ख़ुद का सहारा ख़ुद बन के ख़ुद कि खुशी ख़ुद बन के | कितना कुछ सीखने को हे इस रेखा से |
वो मह्सूस कर रही थी कि आजाद पंछी कैसा महसूस करता है आसमान में |
इंसान के अंदर इतनी शक्तियाँ होती है पर वह पहचान नही पाता है और अंतरात्मा में कई सवालो के जवाब भी होते है बस एक कदम हिम्मत का भरना होता है | रेखा एसी महिलाओ के लिए मिसाल ही है रेखा ने जो हिम्मत दिखायी नए शहर में आके नया जीवन शरु कर लिया और इसी हिम्मत और ईश्वर में श्र्द्धा के चलते आज उसने 2-3 रिक्शा भी खरीद कर किराये से चलाने को दे रखी है |
जीवन के कई रंग होते है सुख दुःख सब कुछ लेकिन मिसाल वही बनते है जो ख़ुद पे भरोसा करके ख़ुद कि मेहनत से लगन से कुछ कर दिखाते है और इसी लिए ये कहवत भी है |” संसार में अकेले आए थे अकेले जाना है तो मुसाफिर किस कि राह देख रहा है ….चल खड़े हो हिम्मत से और निकल चल राहो पर मंजील भी मिलनी है …बिछोना धरती को कर ले और आकाश औड ले ….फिर तो सब तेरा ही है मुसाफिर |”                                                                                                                                                     : PRITI GUPTA

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priti

I m Priti from Ahmadabad ? . I take this platform to share my thoughts and real experiences from my life . I believe in live every moment of life .

10 thoughts on “Vaibhav Aurat Ka”

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