MERI MANORAMA

मनोरमा ….. कितना प्यारा नाम है ये मेरे लिए —हिम्मत , प्यार , ममता ,सुंदरता , शांति से भरपूर और मेरे लिए मेरी हर एक इछा को पूरी करने वाली मनोरमा मेरी हर चिंता और दुःख का अंत करने वाली मोहक अस्तितव वाली जेसे पूरा संसार उसमें हो |
वो दिन कभी भी नही भुला जाता है मुझसे जब मनोरमा मुझसे मिलने मेरे ससुराल 6 दिनों के लिए आई थी | वो दिन मेरे जिंदगी का खजाना है किमती ,तब मेरी बेटी को जन्मे 2 महीने हुए थे और में उसकी देख रेख में रहती थी ,मेरी शादी के 1 साल बाद आई थी मनोरमा | बहुत ही खुश थी मै बहुत प्यार भरी बाते करते थे हम हर सुख दुःख कि बाते और मेरी बेटी को देख मनोरमा तो बहुत ही खुश थी | मनोरमा बहुत एक्टिव थी हर काम में, मेरी बेटी के लिए कपड़े सिले छोटे छोटे प्यारे से , मनपसंद खाना बनाती मेरे लिए वो , मनोरमा कि तबियत ठीक नही रहती थी पिछले कई महिनो से | डाक्टर को दिखाने का बोला हमने उसे खाँसी बहुत आती थी , रात भर खाँसी आती उसे और वो बहुत रोकने कि कोशिश करती थी की किसी और कि नींद ना बिगड़ जाए , हम घुमने जाते कभी , कभी वो स्वेटर बनाने लगती थी मेरी बेटी के लिए बहुत ही किमती समय रहा ये मेरा | कहती नोवेम्बर -दिसेम्बर कि ठंड है बेटी को ना लग जाए |
                                                                                  ” मनोरमा जितने दिन रही एक बात बार बार बोलती रही कि तू मेरे साथ चल थोड़े दीनो के लिए मुझसे खाना नही खया जाता है कुछ भी ख़ुद के हाथो का बनाया नही भाता मुझे तू साथ आ बेटी साथ तेरी और हम कुछ समय साथ रहेंगे और मै तेरे हाथो का बना खाना खाया करुंगी |”
मैंने मेरे घर में बात कि के जाऊ में उसके साथ कुछ दिन रह आउंगी और मुझे भी आराम लगेगा बेटि को वो सम्लहालेगी | पर मुझे ससुराल में से किसी ने जाने नही दिया और उस समय मुझमें भी इतनी हिम्मत नही थी कि जीद करके चली जाऊ , ना ही समझदारी थी मुझमें इतनी कि मनोरमा के साथ केसे भी करके मुझे जाना चाहिए| फिर वो 6 दिन कहा बीत गए पता ही नही चला और वो वापस चली गई अपने घर उसे 10-15 दिनों में ही दिल्ली जाना था टेस्ट कराने |
” मनोरमा के जाने के बाद फोन पर 1 बार बात हुई थी थोड़ी क्युकि उस समय मोबाइल नही थे | दिसेम्बर कि ठंड पड रही थी यहि 6 तरीख थी सुबह सुबह फोन आया मेरे मामा का ….बेटा अब तुम्हारी माँ नही रही हमारे बीच वो ईश्वर के पास चली गयि है कल रात को |”
लगा जैसे पैरो तले जमीन खसक गई हो , जेसे पूरा आसमान टूट पडा हो मुझपे ……….अभी तो मेरी मनोरमा मेरी माँ मेरे साथ रह के गई थी | मेरी माँ मेरी मनोरमा जो मेरी ताकत थी , जिंदगी थी सब कुछ वहि थी मेरे लिए , मेरा जीव उसमें बसा था उसका मुझमें , वो कैसे छोड के जा सकती थी मुझे |
                                                                                 ना ही आँसू निकल पा रहे थे आँखों से और ना दिल रोने से रूक पाया , और बस एक ही बात घुमने लगी कि काश मै चली जाती उसके साथ तो वो जी जाती कीतनी बार बोली थी और मै चाह के भी ना जा पायी | ना ही उसका मुख देख पायी तीसरे दिन पहुचि में माँ के क्युकि बस रात कि थी और अगले दिन पहुँचाती , घर में कदम रखते ही आंसुओ का सैलाब टुट पडा पापा से गले लगते ही |
घर के हर एक सामन को देख के घर के हर कोने को देखते ही दिल रो राहा था माँ ने रात दिन करके ये स्वर्ग बनाया था हम सबके लिए कभी ख़ुद के लीये नही जीया उसने हर वक्त हम बहनो के लिए जीवन जी थी वो हर सुख खुशी हमारे लिए बटोर के रखती थी वो | कहते है ना कि धरती पे ईश्वर माँ बन के आता है , घर के हवाओ मै हमारी सांसो में बसी थी मनोरमा जिसके बीना मेने भी चलाना चाहा भी नही था उसके बीना सब सूना सूना हो गया था |
माँ जो हमे जीना सिखती है , अच्छे संस्कार देती है , जीवन देती है हमे सुखी देखना चाहती है हर हाल में उस माँ के लिए मै क्या कर सकी ?
कोई जवाब ही नही रहा मेरे पास कई बार हम सोचते रह जाते है किसी के लिए कुछ करने का पर कल पे टाल देते है और यहि छोटी सी बात हमे कितना ग्लानि से भर देती है | ना बीता वक्त वापस आता है ना जा चूके अपने लोग , बस एक यादे रह जाती है |
आज इस बात को 26 साल बीत चुके है पर मनोरमा मेरे हर सुख दुःख में साथ रही, उसकी सिखायी बाते,, उसकी दी हुई सीख मेरी हीम्मत बनके | आज शायद ये जो ब्लॉग लीख सकती हूँ , जिबन के हर सुख दुःख को पार करके जिस सम्मान को पाती हूँ या कमा सकती हूँ ये सब उसकी ही तो देन है | वो जहा भी है आत्मा से आत्मा जुडि है उससे ,जब- जब रोई, मै सपनों में आके गले लगा जाती वो हर मुश्किल में से उगार जाती वो ,ना होके सामने भी साथ रही वो मनोरमा माँ जिसकी दी हुई एक एक नियामतो से में भरी हूँ उसका अंश में उसकी झेरोक्स कोपी मै, उसकी सुगंध आती मुझसे मेरे नस नस में बसि है वो माँ मनोरमा | उसकी एक भी चिज़ में उसको नही लोटा सकती बस शुक्रिया कर सकती हू उसका |
इस ब्लॉग के जरीये यहि कहना चाहा कि कभी कल कि राह ना देखे अपने माँ के लिए या किसी और अपने के लिए जो उनके लिए करना चाह्ते है या जो उनको बोलना चाह्ते है बस कर लेना चाहिये क्यूकि वक्त जो बीत जाता है कभी वापस नही आता |                                                    I LOVE YOU MAA I MISS YOU MANORAMA

: Priti Gupta

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priti

I m Priti from Ahmadabad ? . I take this platform to share my thoughts and real experiences from my life . I believe in live every moment of life .

10 thoughts on “MERI MANORAMA”

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