Kabhi katti kabhi batti

नेहा से मिली आज बहुत दीनो बाद उसे देखते ही पता चल गया कि बहुत ही तनाव में है वो और उदास भी | बातचीत के दोरान पता चला कि उसकी पडोसन से कुछ कहा सुनी हो गयी थी उस बात को लेके नेहा इतने तनाव में थी | ये बात नेहा की ही नही है , हम सब के जीबन में भी ऐसा तो होता है कार्यक्षेत्र में , घर में , दोस्तों में और सगे सम्बनधियो या कही और कुछ कहासुनी हो जाती है तो हम उस बात को लेकार इतना तनाव मे या इतना उदास हो जाते है जैसे दुखो का पहाड़ टुट पडा हो | कई घंटे या कई दीन एसे ही सोच में निकाल देते है की मेरे सथ ऐसा क्यू , मैने तो उनका कुछ नही बिगाडा था, मेने तो कुछ नही कहा , मैने तो अच्छा ही सोचा था उनके लिए |

CHALOO BAN JAAYE FIR SE BACHHE  KABHI KATTI KABHI BATTI

अब इस बात मे से बहार निकलना बहुत ही आसान है | एक बात ध्यान में रखनी है की दर एक व्यक्ति का स्वभाव अलग होता है , सबके संस्कार अलग अलग होते है , सबकी उछेर अलग अलग वतावरन में होती है | यहा तक कि माँ , भाई , बहन ,पिता तक के स्वभाव अलग अलग होते है एक ही परिवार होने के बबावजूद | दुसरी बात यह कि हम किसी का स्वभाव हमारे अनुसार नही बदल सकते | तिसरी बात किसी अन्य द्वारा किए वयव्हार से दुखि होकर हम ख़ुद के साथ अन्याय करते है | हमे सिर्फ़ अपने आप पर ध्यान देना हे की हम सही कर रहे है , हमारी राह सही है , हुमरे कर्म सही है और हम किसी को दुःख नही पहुचा रहे है | तो हम क्यू दुखी हो ? फिर अपने जीवन का मालिक हम दुसरे के व्यव्हार को क्यू बनने दे | हमे तो अपने उपर भरोसा करना हे कि हम सही हे | और साथ ही अगर हम ये समझ ले कि हम किसी को अगर माफ कर देते है तो सबसे बडा फायदा हमे ही होता है कि हमारा मन हल्का रहता है शांत रहता है इसी लिये कहा जाता है कि माफी में बहुत बडी ताकत होती है |                                                          इस सब बातो का सार यहि है कि हम ख़ुद ही हमारे सुख दुःख के , तनाव के , उदासी के मालिक है | वो एसे कि सोच ये रखे कि ” हो सकता है कि किसी को ख़ुद ही कोई परेशानी हो , कोई असंतुश्ट हो अपने आप से , किसी का गुस्सा कंट्रोल में ना हो , या किसी की सोच हमसे बहुत अलग है , तो कोई बात नही मैने माफ किया उन्हें ” | और उनकी गलतियो पे ध्यान ना देकर उनकी कोई अच्छि बात को याद कर ले , एक बार कर के तो देखिये माफ बहुत सुकून मिलेगा | किसी से कोई शिकायत ना रखिए उनकी परिस्थिति अनुसार उनके विचार उनके होंगे , हमे तो सिर्फ़ अपना देखना हे कि हम अच्छा कर रहे है अच्छा ही पाएँगे |                                                                                                                  और लॉ ऑफ़ अट्रेक्शन काम करेगा ” प्यार दो प्यार मिलेगा , नफरत दो नफरत मिलेगी , माफी दो माफी मिलेगी सम्मान दो सम्मान मिलेगा ” ये एक लॉजिकल सत्य है | और हर इंसान किसी अपने के लिए हीरा ही होता है हम किसी को बुरा नही कह सकते | बहुत आसान और असरकारक है ये सोच किताबि बात नही है |                                                                              ये मेरा ख़ुद का अनुभव है तो देर किस बात की अभी इसी पल से ये आजमा कर देखिये …”वाह कितनी प्यारे है सब , मेरे अपने है सब और में ऐसा चुम्बक हूँ प्यार का जो पराये थे वो भी मेरे है अब ” |

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priti

I m Priti from Ahmadabad ? . I take this platform to share my thoughts and real experiences from my life . I believe in live every moment of life .

10 thoughts on “Kabhi katti kabhi batti”

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