BETIYO KO SALAM

राष्ट्रीय बालिका दिन —आज 24 जनवरी 2019 है जिसे लोगो के बीच लडकियो के अधिकार को लेकर जागरुकता पैदा करना और उन्हें आगे बड्ने के नए अवसर दिलाने के लिए प्रयास किए जाते है | लडकियो को जिस असमानता का सामना करना पड़ता है,उसे दुनिया के सामने लाना और लडकियो को सब के बीच बराबरी का हक दिलाना , इसके लिए प्रयास किए जाते है |
                                                                           आज एक एसी ही बहदुर लड़की की हम बात करते है …………नीता जब जन्मी थी तब उसके अपने ही घर में बड़े बुजुर्गो द्वारा ये कहने में आता था कि “अरे ये तो काली है इसे तो घिस घिस के नहला के गोरा करना होगा ….फिर उसकी माँ को बहुत बुरा लगता था पर माँ उस समय घर में कुछ बोल पाने कि हिम्मत नही रखती थी | फिर बेटी नीता बडी होती गयी उसका छोटा भाई भी आया ये तो नीता ही फील करती थी कि उसके और भाई के बीच थोड़ा भेद भाव होता था| एसे करते करते बेटी नीता अब 10 क्लास में आ चुकी थी पढने में बहुत होशीयार थी , समझदार और अपनी माँ का बहुत ध्यान रखती थी कोई उसकी माँ को कुछ कह दे उसे सहन नही होता था |
उस समय उसके घर में अचानक माता -पिता के बीच एसी तकलीफ आयी की उसकी माँ को ख़ुद के बचाव के लिए पोलिस स्टेशन जाना पडा घरेलू हिंसा का केस करना पडा |.नीता तो अभी मासूम थी अभी तो उसकी उमर में ख़ुद उसे माता पिता का साथ सहयोग चाहिए था लेकिन उसने जो देखा वो उसके लिए बहुत असह्नीय था पिता का माँ पर हाथ उठाना , गंदी गालिया बोलना , और बार बार ख़ुद नीता ने भी गालिया सुनी मार भी खायी | जहाँ वो इतने बूरे माहोल में भी 10 क्लास में 85 % लाई थी |
वो एसे ही माहोल में अब 12 क्लास में आ चुकी थी उसके कोई दोस्त भी नही बनते थे क्युकि उसके पिता ख़ुद उसकी सहेलियो के घर बोल आते थे कि इस लड़की से बात नही करना ये इसकी माँ जेसी खराब है अब ये बात कोई नही समझ पाया कि उसके भोले से मन पे क्या क्या बीति | इसी बीच उसके पिता ने माँ को परेशान करने के लिए नीता को भी उतना ही परेशान किया क्युकि नीता कि भूल ये थी की वो उसकी माँ को साथ दे रही थी |
और सबसे खराब ये 12 क्लास वाला साल रहा उसके लिए जब 12 वी की एक्साम चल रही थी तब सबके घरो में माता पिता उसके साथ कितना वक्त रहते है कितना ध्यान रखते है बच्चओ को स्कूल छोड्ने जाते – कितने माता पिता वही बेठे रहते …….और नीता वो एक्साम समय में माँ के साथ पोलिस थाने में बेठि थी क्युकि उसके पिता चाहते थे के नीता पास ही ना हो क्युकि नीता परेशान होगी तो माँ केस वापस ले लेगी |
ये समय नीता का ऐसा था कि वो स्कुल बेग लेके थाने में होती थी और पोलिस पेसे खा के बेठि थी और उनके 5-8 घंटे वही बेठे रहना पड़ता था |
फिर दिन गुजरे और अब 12 क्लास में उसे 55 % ही आए जहा उसका सपना था कुछ बनने का वहा वो कोलेज में अब मुश्किल से एडमिशन ले पायी लेकिन ये अंत नही था अब और गंदी गालिया सुनने को मिलती थी और बहुत कुछ ऐसा जो में लिख नही पा रही |
पर नीता को बस अपनी माँ को अकेले नही छोड्ना था नही तो वो जो अपने पिता के साथ हो जाति तो आज उसके पास भी कार होती छोटे भाई कि तरह |
वो सच का साथ दे रही थी कोलेज में भी एक्साम के समय उसके पिता ने उसकी कीताबे चुरा ली और उसके आँख के चश्मे भी | हालत ये थी कि उन्हें कही से न्याय नही मिल रहा था | फिर भी इतने खराब हालतो में वो पड़ी कीताबे माँग के दोस्तों से ली और परिक्शा भी दी | नीता कि इतनी हिम्मत को सलाम करुंगि कि जब जब वो पोलिस थाने जाते उन पोलिस वलो की गंदी नजरो का भी सामना वो निडर होके उन्हें आंखे निकाल के ही देती थी | और एसे करते करते वो आज ख़ुद से , समाज से लडते – लड्ते इतनी आगे निकल आई है की आज उसकी और किसी की ग़लत निगाह डालने की हीम्मत नही होती है और बडी खुब्सूरत नीता अब ख़ुद इतना बडी कम्पनी में बहुत अच्छी सेलेरी कमा कर ख़ुद माँ को और ख़ुद को बहुत बेहतर जीवनजी रही है | उसके पिता के सामने , समाज के सामने क्युकि लोग सुनी सुनाई बातो पे यकीन करके रहते है, एक एसी मिसाल बन के खडी है कि जो बेहद तारिफ के काबील है और बहादुर इसलिए की उसने बहुत कम उमर में ऐसा सब कुछ सहन किया जहा महीलाओ को अब भी बुरे वर्तन का सामना करना पड़ता है वहा वो आज एसे लड़कों को एसे लोगो की पिटाई भी कर देती है | ग़लत बात का हमेशा विरोध करती हे और सच के साथ रहती है |
                                                                           में तो आज के इस ख़ास दीन ये पोस्ट नीता के नाम करती हूँ कि सलाम हो एसी बेटी को जिसके जिसके जनम पे रंग रुप पे और गुणों पे माँ आज भी गर्व करती है जहा बेटि गुणों का खजाना होती हे , सहारा होती है , हिम्मात होती है |आज बेटिया कितने ऊँचे उठ गयी है ,, बेटियो को थोडा चान्स दीजिये एक बेटी ही तो है जो घर को रोनक देती हे , बेटी है तो तो बहु बनेगी और किसी कि पत्नी भी तो तब बनेगि जब बेटि होगी और दुनिया का सबसे बडा रिश्ता ” माँ ” तभी तो माँ बनेगी जब बेटि बचेगी और तभी तो पुरुष जन्मेगा |
” सलाम हो सभी बेटियो को “

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priti

I m Priti from Ahmadabad ? . I take this platform to share my thoughts and real experiences from my life . I believe in live every moment of life .

10 thoughts on “BETIYO KO SALAM”

  1. Aap ki khani bhut dhukh bhri h asahniy h akalpniy h jis maa ka hath aap ke jaisa ho o bhadur larki hmare desh ki misal banegi ye khani un logo ko prerit karegi jini hosla kamjor ho mai eshwor se prathna karta hu ki aap ka damptay jeevan phir se khushal ho jay

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