Antaraatma ki Awaaj

” सुबह उठी हूँ और यही विचार मन में आ रहे है ….मन नही लग रहा है , जी जल रहा है जैसे सब कुछ खत्म हो गया हो और लग रहा है कैसे जीवन गुजरेगा | दिन का एक एक पल जैसे एक एक सदियों जैसा गुजर रहा है | आत्म्हत्या करने का मन होता है पर बच्चो के चेहरे सामने आ जाते है , पता नही दिन कैसे गुजरेगा ,रात आती है तो नींद नही आती और विचारो का तूफान आ जाता है | ना भूख लगती है ना मन जैसे किसी पिंजरे में कैद हूँ |एक अन्जाना सा डर लगा रहता है परछाई कि तरह | बहुत कोशिश करती हूँ पर डर से बाहर निकल ही नही पा    रही हूँ |                                             
डायरी के पन्ने पलट्ते रहे ऐसा ही दर्द भरा लिखा था पन्नो पर | बीच के एक पन्ने पर नजर पडी तभी, लिखा था ‌‌—” हर इंसान के मन में कोई ना कोई कारण से एक अन्जाना सा डर तो रहता ही है , उसका कुछ खो जाने का डर , कुछ बिछड जाने का डर | मै अपने मन के डर से लड तो रही हूँ हर पल पर पूरी तरह उसमें से बाहर नही निकल पा रही हूँ | मुझे बाहर निकलना है इस डर से,,,, इस पिंजरे से | लड्ते लड्ते विचारो से इतना तो समझ आ रहा है कि , ये मेरी जिंदगी है इसे में ही सुधार सकती हूँ , कोई मदद नही कर सकता , ख़ुद मुझे ही मेरी मदद करनी होगी | हालात का सामना करना भी जरुरी हे और आत्मनिर्भर बनना भी जरूरी है ये मेरी अंतरात्मा कि आवाज है ”
एसी हालत में इंसान कई अलग अलग कारणो से आ सकता है , पर इन पन्नो पर लिखी एक बात बहुत मायने रखती है और सत्य भी है कि अपनी अंतरात्मा कि आवज भी सुनिये | जहा जीबन में मुसिबते आती है वहा उनके हल भी होते ही है | पुरी दुनिया में एक ही इंसान होता है जो मदद कर सकता है वो हम स्वयम ही है | इंसान कह्ता है में ईश्वर पर भरोसा करता हूँ , पर वो पूरी तरह नही कर पाता है साथ ही ख़ुद पर से भी वो अपना विश्वास खो बैठ्ता है तब जाके ये ” डर ” शब्द उस पर हावी हो जाता है |
“ये मेरे अन्दर का ही जवाब मिला मुझे कि जो वक्त चल रहा है उस से भाग तो नही सकती मै |” तो फिर बेहतर सुकुन वाली जिंदगी कि राह डर के साथ देखने से बेहतर होगा की में स्वीकार कर लु इस वक्त को जो चल रहा है और इसमे से कुछ अच्छे पल तलाश कर के कोशिश करु अपने जीवन को मंजील तक ले जाने का | दुःख को भी अपना समझना होगा , घूट घूट कर जींने से बेहतर है आगे बढो , चलते रहो ख़ुद को इतना मजबूत बना लो की सम्स्याये भी कहे कि इसे कैसे परेशान करे अब | ख़ुद हारने की जगह मुश्किलों को हराते चलो , इसी लिए कहते है डर के आगे जीत है |
रेखा की डायरी के ये पेज जीनमे मुसीबतो के साथ उनका हल भी था | आज रेखा बहूत बडी बीजनेस वुमन है साथ ही उसकी पह्चान एक स्ट्रोंग पर्सन की है जो लोगो की मदद करती है |
सार यहि है की पूरी दुनिया में सबसे बडा हमसफर , मददगार इंसान हमारे लिए हम ख़ुद ही होते है , और जब तक कोई विकट परिस्थिती नही आती हम अपनी शक्तियों को नही पह्चान पाते है | यहि एक समय होता है जब ईश्वर एक पत्थर में से एक मुर्ती बना रहा होता है जो चोट खाकर एक लाजवाब रुप ले लेती है |
” बिखरी तू जिंदगी तभी तो में सवर गयी ”                                                                             

  • By Priti Gupta

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priti

I m Priti from Ahmadabad ? . I take this platform to share my thoughts and real experiences from my life . I believe in live every moment of life .

10 thoughts on “Antaraatma ki Awaaj”

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