HAPPY WOMEN’S DAY

आज 8 मार्च है और हर साल इंटरनेशनल महिला दिवस 8 मार्च को मनाया जाता है , महिलाओ को समर्पित दिन , उन्हें प्रोत्साहित करने का दिन |
एसे तो आजकल महिलाओ कि परिस्थिति में काफ़ी हद तक सुधार आया है , हर क्षेत्र में महिलाओ कि प्रगति हो रही है फिर भी बहुत सी महिलाओ को उनके अधिकारो का पता नही है , और कुछ महिलाये हिम्मत नही कर पाती है आगे बडने के लिये

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देखा जाये तो पुरुष और स्त्री दोनों कि अहमियत समान ही होती है , दोनों एक दुसरे के पूरक होते है पर कई वजहो से बहुत सी महिलाओ को समाज में , घरों में , उनके काम -काज के स्थानों पर और अन्य जगहों पर अभी भी मान सम्मान नही मिल पाता है , अभी भी महिलाओ का शोषण हो रहा है |
जहाँ महिलाये बहुत प्रगति कर रही है वही कई महिलाये अब भी चुप चाप सब सहन कर रही है …….यहा पर तो में इतना ही कहना चहुंगि कि सहन भी उतना ही किया जना चाहिए जिससे ख़ुद का और ख़ुद से जुड़े हुए लोगो का कुछ भला हो | मेरे संपर्क में एसे लोग आए है जिनमें पुरुष स्त्री को कुछ नही समझते उनकी नजरो में महिलाये सिर्फ़ घर सम्हालने के लिए और उनकी गुलामी करने के लिए ही होती है , वहि पे ख़ुद महिलाये भी जुल्म सहन करते हुए कहती है कि ” मर्द तो पीतल के लोटे समान होते है उनको घिसो तो फिर से चमकने लगेंगे ” मतलब उनकी सारी गलातिया या सारे कदम हमेशा सही ही होते है | जहा महिलाये ख़ुद ही ख़ुद को सम्मान नही देंगी ख़ुद कि सहायता ख़ुद ही नही करेंगी और कोई हिम्मत दिखाए बिना ठोस कदम नही लेंगी कोई और उनकी कितनी मदद करेगा फिर ? उनको हम कितना भी सिखाते है कि कोई भी अत्यचार हो रहा है तो विरोध करो उसका , कदम बडाओ अपना अस्तितव बनाओ और अपने बच्चो को भी एक बेहतर जीवन दो किंतु उनके जवाब होते है कि हम क्या करे , कोई सुनता नही , हम तो औरत है और औरतो को तो एसे ही रह्ना पड़ता है |
ये सिर्फ़ उनकी एसि सोच होती है जो उनको लचार बनाती है |


अपना डर छोड के , ख़ुद का सम्मान करते हुए और हिम्मत के साथ उन्हे भी हर बुराई का सामना करना चाहिए और एक बेहतर जीवन ख़ुद का भी और अपने बच्चो का भी बनाना चाहिए जिसमे ख़ास अपनी लडकियो को उच्च पडाई लिखाई और स्वमान के साथ जिना सिखाना चाहिये |
फिर से कहुंगि कि हम सभी के विकास में पुरुष और महिलाओ का एक समान स्थान जरूरी है , हमारे ग्रंथो में भी स्पश्ट हे कि दोनों एक दुसरे के पूरक है दोनों का स्थान समान है दोनों का सम्मान एक समान है जितना महत्व पुरुशो का है उतना ही महिलाओ का | तो आज से अभी से महिलाओ को स्वयं भी ख़ुद के परिवार के विकास के लिए भी ख़ुद को सम्ममान देते हुए एक देवी स्वरूप को ख़ुद में उजागर करना चाहिए | पहला कदम अपने घर से शुरू करे हाथ सहायता के लिए मिलेंगे बहुत पर पहले ख़ुद खड़ा होना जरूरी है आत्म्विश्वास के साथ |


उन सभी महिलाओ को हम सलाम करते है जिन्होंने ख़ुद को एक मिसाल बनाया , हर क्षेत्र में कमाल के कदम बडाते हुए ख़ुद का , अपने परिवार का और अपने देश का भी नाम रोशन किया है
और आज के इस ख़ास दिन पर सभी महिलाओ को शुभकामनाये

“HAPPY WOMENS DAY ”

Priti Gupta ….

BETIYO KO SALAM

राष्ट्रीय बालिका दिन —आज 24 जनवरी 2019 है जिसे लोगो के बीच लडकियो के अधिकार को लेकर जागरुकता पैदा करना और उन्हें आगे बड्ने के नए अवसर दिलाने के लिए प्रयास किए जाते है | लडकियो को जिस असमानता का सामना करना पड़ता है,उसे दुनिया के सामने लाना और लडकियो को सब के बीच बराबरी का हक दिलाना , इसके लिए प्रयास किए जाते है |
                                                                           आज एक एसी ही बहदुर लड़की की हम बात करते है …………नीता जब जन्मी थी तब उसके अपने ही घर में बड़े बुजुर्गो द्वारा ये कहने में आता था कि “अरे ये तो काली है इसे तो घिस घिस के नहला के गोरा करना होगा ….फिर उसकी माँ को बहुत बुरा लगता था पर माँ उस समय घर में कुछ बोल पाने कि हिम्मत नही रखती थी | फिर बेटी नीता बडी होती गयी उसका छोटा भाई भी आया ये तो नीता ही फील करती थी कि उसके और भाई के बीच थोड़ा भेद भाव होता था| एसे करते करते बेटी नीता अब 10 क्लास में आ चुकी थी पढने में बहुत होशीयार थी , समझदार और अपनी माँ का बहुत ध्यान रखती थी कोई उसकी माँ को कुछ कह दे उसे सहन नही होता था |
उस समय उसके घर में अचानक माता -पिता के बीच एसी तकलीफ आयी की उसकी माँ को ख़ुद के बचाव के लिए पोलिस स्टेशन जाना पडा घरेलू हिंसा का केस करना पडा |.नीता तो अभी मासूम थी अभी तो उसकी उमर में ख़ुद उसे माता पिता का साथ सहयोग चाहिए था लेकिन उसने जो देखा वो उसके लिए बहुत असह्नीय था पिता का माँ पर हाथ उठाना , गंदी गालिया बोलना , और बार बार ख़ुद नीता ने भी गालिया सुनी मार भी खायी | जहाँ वो इतने बूरे माहोल में भी 10 क्लास में 85 % लाई थी |
वो एसे ही माहोल में अब 12 क्लास में आ चुकी थी उसके कोई दोस्त भी नही बनते थे क्युकि उसके पिता ख़ुद उसकी सहेलियो के घर बोल आते थे कि इस लड़की से बात नही करना ये इसकी माँ जेसी खराब है अब ये बात कोई नही समझ पाया कि उसके भोले से मन पे क्या क्या बीति | इसी बीच उसके पिता ने माँ को परेशान करने के लिए नीता को भी उतना ही परेशान किया क्युकि नीता कि भूल ये थी की वो उसकी माँ को साथ दे रही थी |
और सबसे खराब ये 12 क्लास वाला साल रहा उसके लिए जब 12 वी की एक्साम चल रही थी तब सबके घरो में माता पिता उसके साथ कितना वक्त रहते है कितना ध्यान रखते है बच्चओ को स्कूल छोड्ने जाते – कितने माता पिता वही बेठे रहते …….और नीता वो एक्साम समय में माँ के साथ पोलिस थाने में बेठि थी क्युकि उसके पिता चाहते थे के नीता पास ही ना हो क्युकि नीता परेशान होगी तो माँ केस वापस ले लेगी |
ये समय नीता का ऐसा था कि वो स्कुल बेग लेके थाने में होती थी और पोलिस पेसे खा के बेठि थी और उनके 5-8 घंटे वही बेठे रहना पड़ता था |
फिर दिन गुजरे और अब 12 क्लास में उसे 55 % ही आए जहा उसका सपना था कुछ बनने का वहा वो कोलेज में अब मुश्किल से एडमिशन ले पायी लेकिन ये अंत नही था अब और गंदी गालिया सुनने को मिलती थी और बहुत कुछ ऐसा जो में लिख नही पा रही |
पर नीता को बस अपनी माँ को अकेले नही छोड्ना था नही तो वो जो अपने पिता के साथ हो जाति तो आज उसके पास भी कार होती छोटे भाई कि तरह |
वो सच का साथ दे रही थी कोलेज में भी एक्साम के समय उसके पिता ने उसकी कीताबे चुरा ली और उसके आँख के चश्मे भी | हालत ये थी कि उन्हें कही से न्याय नही मिल रहा था | फिर भी इतने खराब हालतो में वो पड़ी कीताबे माँग के दोस्तों से ली और परिक्शा भी दी | नीता कि इतनी हिम्मत को सलाम करुंगि कि जब जब वो पोलिस थाने जाते उन पोलिस वलो की गंदी नजरो का भी सामना वो निडर होके उन्हें आंखे निकाल के ही देती थी | और एसे करते करते वो आज ख़ुद से , समाज से लडते – लड्ते इतनी आगे निकल आई है की आज उसकी और किसी की ग़लत निगाह डालने की हीम्मत नही होती है और बडी खुब्सूरत नीता अब ख़ुद इतना बडी कम्पनी में बहुत अच्छी सेलेरी कमा कर ख़ुद माँ को और ख़ुद को बहुत बेहतर जीवनजी रही है | उसके पिता के सामने , समाज के सामने क्युकि लोग सुनी सुनाई बातो पे यकीन करके रहते है, एक एसी मिसाल बन के खडी है कि जो बेहद तारिफ के काबील है और बहादुर इसलिए की उसने बहुत कम उमर में ऐसा सब कुछ सहन किया जहा महीलाओ को अब भी बुरे वर्तन का सामना करना पड़ता है वहा वो आज एसे लड़कों को एसे लोगो की पिटाई भी कर देती है | ग़लत बात का हमेशा विरोध करती हे और सच के साथ रहती है |
                                                                           में तो आज के इस ख़ास दीन ये पोस्ट नीता के नाम करती हूँ कि सलाम हो एसी बेटी को जिसके जिसके जनम पे रंग रुप पे और गुणों पे माँ आज भी गर्व करती है जहा बेटि गुणों का खजाना होती हे , सहारा होती है , हिम्मात होती है |आज बेटिया कितने ऊँचे उठ गयी है ,, बेटियो को थोडा चान्स दीजिये एक बेटी ही तो है जो घर को रोनक देती हे , बेटी है तो तो बहु बनेगी और किसी कि पत्नी भी तो तब बनेगि जब बेटि होगी और दुनिया का सबसे बडा रिश्ता ” माँ ” तभी तो माँ बनेगी जब बेटि बचेगी और तभी तो पुरुष जन्मेगा |
” सलाम हो सभी बेटियो को “

PYAAR Kya Hai

“प्यार” सुनते ही मन फूलो की तरह खिलने लगता है , ये एक एसी सौगात है जिससे जीवन महकने लगता है | प्यार का हम सबके जीवन मै सबसे बडा स्थान होता है , ये प्यार कई रिश्तों से जुडा होता है ……माता , पिता , भाई ,बहन ,दोस्त , रिश्तेदार , बच्चो , और सबसे ज्यादा जीवनसाथी से जुडा होता है |सबसे महत्वपूर्ण प्यार प्रेमी का , जीवनसाथी का होता है हम सबके जीवन मै , हम सब प्यार चाहते है देते भी है फिर भी अब तक समझ बहुत कम पाए है की प्यार है क्या ?                                                                                                                                                    स्पिरिचुअल लाइफ में प्यार सबसे मेन पोइंट होता है कहते है ये आत्मा प्यार कि ही बनी होती है क्युकि आत्मा [ हम सब ] ईश्वर की रचना है और ईश्वर स्वयम प्यार है | यही कारण है की इंसानो , पंछियो , जानवरो , हर जिवित वस्तु , पेड़ पोधो , और वायुमंडल पर भी प्यार कि ही असर होती है | बहुत आसान है समझना जानवरो को प्यार देते है तो वो हमे भुलते भी नही है और हमारे ही होके रह जाते है , पेड़ पोधो को प्यार कि फिलींग से सीचते है तो खुब अच्छे से वो खील उठ्ते है , ध्यान देना ….. जब थोड़ा भी झगडा , तनाव हम देखते है हम वहा ज्यादा देर नही रहते मन विचलीत होने लगता है वही किसी प्यारी फेमेली को या प्यार भरे प्रेमियो को देखते है हमारा मन भी खुशी महसुस करने लगता है | अब जब ये प्यार एक प्रेमी कपल ,या पति पत्नी में कभी कभी दुःख का ,दूरियो का कारण भी बन जाता है | हम एसी अंजानी भुले कर बेठते है ………………….एक लव स्टोरी शुरू होती है मेल-फिमेल के बीच में तब दोनों एक दुसरे को बहुत महत्व देते है , बहुत सारा प्यार देते है , केयर करते है फिर धीरे धीरे शायद दोनों को पता भी नही चलता और वो एक दुसरे कि केयर करना छोड देते है | उसकी जगह एक दुसरे की कमिया , शिकवे ,शिकायते , शक और ईगो यही देखने और देने लगते है , और प्यार का सबसे बडा दुश्मन ईगो और केयर करना छोड देना है | हम प्यार की जगह अपने साथी को अपने अनुकूल बनाने में लग जाते है उसकी फ्रीडम छीन कर हम उसे बांधने लगते है , और धीरे धीरे हम दीखाने लगते है की अब हमको नही पड़ी तुम्हारी या तुम नही याद करते तो में क्यू करु , मै क्यू आगे होके बात करु या मै क्यू बताउ की मुझे फर्क पड़ता है तुम्हारे दुर जाने से एसे करते करते वो प्यार तो बिचारा मरने ही लगता है साथ ही दोनों के बीच एक दरार पडने लग्ती है                                                                                                          यही सबसे बडी भुल हम कब करने लगते है पता भी नही चलता है | प्यार एक एसी सोगात है जिसे जितने खुले दिल से देंगे उतनी ही कई गुना होकर मिलती है पर हम देना बंद करके पाने की चाहत ज्यादा करने लगते है भूल जाते है कि प्यार देने के लिए , केयर करने के लिए ही है छुपाने के लिए नही है | यहा तक की जापान में एक रिसर्च ने प्रूफ किया है लव और हेट की असर पानी पे ..दो ग्लास में पानी भरा गया और एक पर प्यार दुसरे पर नफरत लिख के छोड़ दिया जिस ग्लास पे प्यार लिखा था उस पानी में सुनहरी कीरणे पायी गयी और जिस पर नफरत लिखा था वो पानी पीने लायक ही नही था तो सोचिये हम सभी पर इसकी कितनी असर होती होगी |
तो प्यार डर के नही , ईगो से नही अवोइड करने से नही जीवित रहेगा मर जायेगा ऐसा करने से | प्यार तो होता ही देने के लिए है हम तो , जिसको सबसे ज्यादा चाहते है उसकी को प्यार देने से डरने लगते है की कही ये हमारा ना हुआ तो , और अगर मेरे साथी को लगने लगेगा की में उसके बिना नही रह सकता [ सकती] तो वो मुझे नही पुछेगा या मेरी नही सुनेगा | ये बाते तो हीसाब की और दीमाग की हो जाती है इसमे प्यार कहा बचा प्यार तो अनकंडीशनल प्यार करे जो जैसा है उसे वैसा ही स्वीकार करना है , कुछ पाने की चाहत नही करके प्यार देना है तब तो प्यार ,”प्यार ” कहलायेगा इसिलिये तो प्यार को पूजा भी कहते है |

Priti Gupta

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Talaak ke baad

परेश शाम के समय दरिया के किनारे बैठा था | पानी कि लहरो को आते जाते देख रहा था उसके दिल की धडकने भी लहरो की तरह चल रही थी |” परेश उसका दो साल का बेटा सोनु और उसकी पत्नी नैना तीनों समुद्र के किनारे घुमने आए थे ,सोनु उनकी गोद मै खेल रहा था | परेश इतना खुश था उसके परिवार के साथ , सोनु को लेके गुब्बारे लिए ढेर सारे और आसमान में उडा दिए नैना उनको देख कर मुस्कुरा रही थी कितना प्यारा था वो लम्हा | अचानक एक आवाज से वह अपने सपनों से बाहर आया ” | फिर दर्द महसुस करने लगा वो ……परेश उठा और धीरे धीरे बेजान कदमों से घर कि और निकल पडा |                        
परेश को पिछले कई सालो से जानती थी मै , एकदम साधारण जीवन , इमानदार , कोई बुरी आदत नही , घर ग्रहस्थी को अहमियत देने वाला | अब परेश का डिवोर्स हुए 6 साल हो चूके थे , किन्ही कारणो से परेश और नैना के बीच का ये सम्बन्ध टीक ना सका और दोनों अलग हो गए | ऐसा नही कि उन्होंने कोशिश नही कि इस रिश्ते को बचाने की पर होता हे ऐसा कभी की दो दिल अच्छे होते हुए भी साथ नही रह पाते | परेश के डीवोर्स के बाद वो पूरी तरह बिखर गया था , डीप्रेशन की दवाइयाँ भी लेनी पड़ी उसे , क्युकि जहा इंसान पूरी जिंदगी जिसके साथ बिताने के सपने देखता है और किन्ही कारणो से जब वो जीवन साथी हमेशा के लिया जुदा हो जाते है बहुत ही तकलीफ होती है | दो परीवार अलग हो जाते है वही बच्चो पर बहूत गहरा असर पड्ता है |
परेश भी बहुत ही उदास रहता था जीवन जैसे रूक गया था , लम्हे जैसे से ठहर से गए थे | कही मन नही लगता था उसका , कही घुमने जाता तो उसे अपना परीवार याद आता था , सीनेमा हाल , रेस्टोरेंट , माल शापींग , शादी या कही और जहा वो सबको अपने परीवार के साथ देखता था उसे अकेलापन लगता बहुत | साथ ही समाज के लोग , अडोस पडोस के लोग एक ही सवाल पूछ्ते …. परेश कोई और लड़की देखी की नही अब तक , दूसरी शादी कर लो अब , कब तक एसे अकेले रहोगे ? एसे सवाल पिछा ही नही छोड्ते थे चारो और से | साथ ही एसे समय में कोई लोग उसे अकेला देख कर प्यार जता कर उनके कुछ काम भी करवा लिए करते थे | परेश सीधा था ना भी नही बोल पाता था | कई बार तो ऐसा भी होता था किसी फीमेल से बात करता दीख जाता तो वही अफवाहे चालु हो जाती कई तरह कि जैसे किसी से अफेयर होगा या फिर लगता है परेश अब बीगड गया है , ग़लत काम करता है | परेश ही जानता था की उस पर क्या बीत रही थी एक तो घर पर माँ जीनको काम काज करने में भी उमर के अनुसार तकलीफ होती थी उनकी चिंता ऊपर से आफीस का काम साथ ही घर का काम काज कीस कीस को समझाता वो | बेटे की याद भी बहूत सताती थी उसे |                                                        परेश से मेरी बातचीत रोज होती थी उसके हर दिन का दर्द में जानती थी वो नया जीवन साथी देख भी रहा था पर अब वो जल्दी किसी से जुड्ने में भी डरता था उसे लगता पता नही वापस से वो शादी नीभ पायेगी या नही , कई अनजाने डर घर कर गए थे मन में उसके ,और कोई जब अपना परीवार खो देता है तो उस इंसान के आँसू आँखों की जगह दिल से निकलते है | ये बात बहुत कम लोग समझ पाते है की एक लंबा सफर तय करने के बाद जब कोई रिश्ता टुट जाता है तब जो दिल को चोट लगती है वो घाव भी जल्दी नही भरते है |                               
अब इन सब बातो को बीते काफ़ी समय हो चूका था फिर परेश की मुलाकत एसे मित्रों से हुई जो पोसिटीव विचारो में मानते थे साथ ही उसने मेडीटेशन भी किया और थोड़ा आध्यत्मिक ज्ञान भी लिया ख़ुद के अकेलेपन से ख़ुद के डर से ख़ुद ही लड कर ख़ुद मजबूत बना और धीरे धीरे दर्द में से बाहर निकलने लगा | और आज वो एक बेहतर जीवन जी रहा है , अकेलेपन को उसने अपना मित्र बना लिया और उसमें भी खुशी के पल ही मिलें उसे ख़ुद का साथी ख़ुद बना वो , आज वो बहूत ही स्ट्रोंग पर्सनेलिटी का हो गया है , साथ ही अब खुले मन से दिल से वह नये जीवन साथी कि तलाश में है | आशा है जल्दी ही वह गुड न्यूज़ देगा | हम सबकी दुआये भी है साथ उसके | इतना कहुगी जीवन है जीना ही है इसे, कभी धूप कभी छान्व आनी ही है तो क्यू ना हर पल को हम एक अड्वेंचर कि तरह ले , उसे भी एंजोय करे हार हो या जीत ये सोचे बिना और जब हम मन से हार नही मानते तो कोई भी नही हरा सकता हमे तो ये लाइफ की प्रोब्लेम्स क्या टिक पायेंगी |                                                                                                                       – Priti Gupta

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Break up

” ब्रेकअप ” …… कोई बिरला भाग्यशाली ही होगा जिसने इस हालात का सामना ना किया हो | जीसे हम दिलोजान से चाहते हो , जिसके बिना ना सुबह होती हो ना रात , जिसके खयाल हर पल में समाये हो और जिसके साथ पूरा जीवन जिने के सपने देखे हो | जब वो हमसफर छोड के हमेशा के लिए चला जाय तब जो इंसान के हालात होते है उसे हम पुरी तरह शब्दों में बयान नही कर सकते शायद | एक दिल जो प्यार से भरा होता है अचानक टूट जाता है , कहाँ प्यार और कहाँ ब्रेकअप दोनों एकदम विपरीत | चाहे कोई भी उमर हो ये ब्रेकअप एक प्यार भरे दिल को दर्द से भर देता है |
सागर का फोन आया आज कहने लगा सब कुछ खत्म हो गया है मेरे जीवन में , अब जीने कि चाह नही रही ,लगता है पुरी दुनिया लूट गयी है मेरी | चारो और अंधेरा ही नजर आता है , लगता है बस अब आगे जीवन में कुछ नही जीने को , | पुछ्ने पर बताया उसने कि उसकी प्रेमिका ने उसे छोड कर किसी और से शादी कर ली थी | इस धोखे को वो सहन नही कर पा रहा था | और डीप्रेशन में चला गया था सागर ख़ुद को लूसर समझने लगा था उसे लाने लगा की क्या वो पर्फेक्ट नही है क्या कमी थी उसमें एसे कई नकारात्मक विचार उसके मन में आ रहे थे , सागर का प्यार भरा दिल टूट के बिखर गया था |
अब सागर कि ये परिस्थिति अच्छी तरह समझी जा सकती हे की जब हम किसी को दिलोजान से प्यार करते है अपना सब कुछ उसे ही समझते है और वो इंसान हमे छोड कर चला जाये , हमारी भावनओ के साथ खिलवाड करके ,धोखा देके या कोई और कारण से | तब हमे यहि खूबसूरत दुनिया सिर्फ़ और सिर्फ़ अंधेरे समान लगने लगती है जेसे सब रुक गया हो ,खो गया हो | लगता है जैसे एक प्यार भरे दिल ने धड्कना ही बंद कर दिया हो |सूना सूना जहान लगने लगता है | ब्रेकअप के कारण भी अलग अलग होते है मेल हो या फिमेल दिल तो टूट कर दर्द से भर ही जाता है |
अब इस हालत से बाहर कैसे आए ? जैसा मैंने पहले भी कह| है   ” नामुमकीन ” कुछ भी नही होता |     
सबसे पहला कदम होगा की ख़ुद को कोसना , दर्द देना , ख़ुद को लाचार और अकेला समझना बंद कर दिजिये | इसके लिए अपने दिमाग में , मन में ये बात डालिये की पुरी दुनिया में सिर्फ़ एक इंसान हमे छोड कर चला गया तो क्या उसके सामने हमे चाहने वाले कितने सारे लोग है माँ, पिता,भाई , बहन , दोस्त ….. और खुदा भी हमे चाहते है | इन सब के दिल में हमारे लिए प्यार है इन सब रिश्तों की , सम्बंधो के प्यार कि कदर कीजिये |

दुसरा कदम भरिये, ख़ुद को प्यार कीजिये , ख़ुद की वेल्यु कीजिये | जब तक हम ख़ुद को प्यार नही करेंगे तब तक हम कभी संतुश्ट नही होंगे | सोचिये कि हम हमारे अपनो , के लिए और कोई ना भी हो तो ख़ुद के लिए , जिसने हमे बनाया इस धरती पे लाया उसके लिए हम अनमोल है | बेपनाह प्यार कीजिये ख़ुद को |

तीसरा कदम लीजिए माफी , माफ कर दीजिये उसे जो साथ ना दे सका क्युकि माफी एक एसी चिज है जिससे सबसे पहले हमे ही सुकून मिलता है | आसान नही लगता तो आसान बना दीजिये सोचिये कि कभी जिसे हमने इतना चाहा उसे कोस के उससे नराज होके क्या हम अपने पवित्र प्यार का अपमान नही कर रहे है | सोचिये कि चाहे वो साथ ना दे सके , हमे समझ ना सके तो कोई बात नही पर हमने तो दिल से प्यार किया सच्चा प्यार किया तो हमे अपना दिल बडा रख के उसे माफ कर देना है , खुश रहे वो जहाँ रहे | तब ही हमारा प्यार , “प्यार” कहलायेगा |
चोथा कदम भरिये कि ख़ुद को व्यस्त रखिए किसी काम में या मंपसंद कोई कला में | इस से मन , दिमाग दोनों स्वस्थ रहेंगे और बहुत ही जल्दी दर्द में से बाहर आ जायेंगे |                                                                                       और आख़िर में दिल को दिमाग को इस तरह तैयार कर लीजिए कि हम स्वयं इतनी मजबूत , किमती रचना है संसार में कि कुछ भी कर सकते है , ये प्यार या ये साथी आखरी नही था | में डीसर्व करती हूँ सच्चा जीवन साथी , प्यार तो मुझे मिलना ही है , कोई शक नही कि अपको दिल कि गहराइयो से चाहने वाला साथी मिलेगा ही | साथ ही मैने अपने पिछ्ले पोस्ट में बताया ही है कि दुनिया का सबसे बडा , सच्चा हमसफर हम ख़ुद ही है , तो हमे किसी अन्य पर इतना भी आश्रीत होने कि जरुरत नही कि उनके जाने के बाद हम ये किमती जीवन जो हमारा है उसे खो दे या बरबाद करदे | और ये गीत भी सुन लीजिए कभी ….. छोड दे सारी दुनिया किसी के लिए ये मुनासीब नही आदमी के लिए ……प्यार से भी जरूरी क काम है …….
और ये ख़ास  kisi  के लिए अपनो को ,अपने घर के प्रियजनो को दर्द ना दे क्युकि सबसे ज्यादा दर्द उन्हें ही होता है जब वो आपको दर्द में देखते है | ख़ुद को ख़ुद के प्यार इतना लबालब भर लीजिए की फिर ये प्यार कही बहार किसी और में ना खोजना पडे |
तो अब बोलिये ना ” आई लव यु जिंदगी ”                                                                          

  • By Priti Gupta

 

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Antaraatma ki Awaaj

” सुबह उठी हूँ और यही विचार मन में आ रहे है ….मन नही लग रहा है , जी जल रहा है जैसे सब कुछ खत्म हो गया हो और लग रहा है कैसे जीवन गुजरेगा | दिन का एक एक पल जैसे एक एक सदियों जैसा गुजर रहा है | आत्म्हत्या करने का मन होता है पर बच्चो के चेहरे सामने आ जाते है , पता नही दिन कैसे गुजरेगा ,रात आती है तो नींद नही आती और विचारो का तूफान आ जाता है | ना भूख लगती है ना मन जैसे किसी पिंजरे में कैद हूँ |एक अन्जाना सा डर लगा रहता है परछाई कि तरह | बहुत कोशिश करती हूँ पर डर से बाहर निकल ही नही पा    रही हूँ |                                             
डायरी के पन्ने पलट्ते रहे ऐसा ही दर्द भरा लिखा था पन्नो पर | बीच के एक पन्ने पर नजर पडी तभी, लिखा था ‌‌—” हर इंसान के मन में कोई ना कोई कारण से एक अन्जाना सा डर तो रहता ही है , उसका कुछ खो जाने का डर , कुछ बिछड जाने का डर | मै अपने मन के डर से लड तो रही हूँ हर पल पर पूरी तरह उसमें से बाहर नही निकल पा रही हूँ | मुझे बाहर निकलना है इस डर से,,,, इस पिंजरे से | लड्ते लड्ते विचारो से इतना तो समझ आ रहा है कि , ये मेरी जिंदगी है इसे में ही सुधार सकती हूँ , कोई मदद नही कर सकता , ख़ुद मुझे ही मेरी मदद करनी होगी | हालात का सामना करना भी जरुरी हे और आत्मनिर्भर बनना भी जरूरी है ये मेरी अंतरात्मा कि आवाज है ”
एसी हालत में इंसान कई अलग अलग कारणो से आ सकता है , पर इन पन्नो पर लिखी एक बात बहुत मायने रखती है और सत्य भी है कि अपनी अंतरात्मा कि आवज भी सुनिये | जहा जीबन में मुसिबते आती है वहा उनके हल भी होते ही है | पुरी दुनिया में एक ही इंसान होता है जो मदद कर सकता है वो हम स्वयम ही है | इंसान कह्ता है में ईश्वर पर भरोसा करता हूँ , पर वो पूरी तरह नही कर पाता है साथ ही ख़ुद पर से भी वो अपना विश्वास खो बैठ्ता है तब जाके ये ” डर ” शब्द उस पर हावी हो जाता है |
“ये मेरे अन्दर का ही जवाब मिला मुझे कि जो वक्त चल रहा है उस से भाग तो नही सकती मै |” तो फिर बेहतर सुकुन वाली जिंदगी कि राह डर के साथ देखने से बेहतर होगा की में स्वीकार कर लु इस वक्त को जो चल रहा है और इसमे से कुछ अच्छे पल तलाश कर के कोशिश करु अपने जीवन को मंजील तक ले जाने का | दुःख को भी अपना समझना होगा , घूट घूट कर जींने से बेहतर है आगे बढो , चलते रहो ख़ुद को इतना मजबूत बना लो की सम्स्याये भी कहे कि इसे कैसे परेशान करे अब | ख़ुद हारने की जगह मुश्किलों को हराते चलो , इसी लिए कहते है डर के आगे जीत है |
रेखा की डायरी के ये पेज जीनमे मुसीबतो के साथ उनका हल भी था | आज रेखा बहूत बडी बीजनेस वुमन है साथ ही उसकी पह्चान एक स्ट्रोंग पर्सन की है जो लोगो की मदद करती है |
सार यहि है की पूरी दुनिया में सबसे बडा हमसफर , मददगार इंसान हमारे लिए हम ख़ुद ही होते है , और जब तक कोई विकट परिस्थिती नही आती हम अपनी शक्तियों को नही पह्चान पाते है | यहि एक समय होता है जब ईश्वर एक पत्थर में से एक मुर्ती बना रहा होता है जो चोट खाकर एक लाजवाब रुप ले लेती है |
” बिखरी तू जिंदगी तभी तो में सवर गयी ”                                                                             

  • By Priti Gupta

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Kabhi katti kabhi batti

नेहा से मिली आज बहुत दीनो बाद उसे देखते ही पता चल गया कि बहुत ही तनाव में है वो और उदास भी | बातचीत के दोरान पता चला कि उसकी पडोसन से कुछ कहा सुनी हो गयी थी उस बात को लेके नेहा इतने तनाव में थी | ये बात नेहा की ही नही है , हम सब के जीबन में भी ऐसा तो होता है कार्यक्षेत्र में , घर में , दोस्तों में और सगे सम्बनधियो या कही और कुछ कहासुनी हो जाती है तो हम उस बात को लेकार इतना तनाव मे या इतना उदास हो जाते है जैसे दुखो का पहाड़ टुट पडा हो | कई घंटे या कई दीन एसे ही सोच में निकाल देते है की मेरे सथ ऐसा क्यू , मैने तो उनका कुछ नही बिगाडा था, मेने तो कुछ नही कहा , मैने तो अच्छा ही सोचा था उनके लिए |

CHALOO BAN JAAYE FIR SE BACHHE  KABHI KATTI KABHI BATTI

अब इस बात मे से बहार निकलना बहुत ही आसान है | एक बात ध्यान में रखनी है की दर एक व्यक्ति का स्वभाव अलग होता है , सबके संस्कार अलग अलग होते है , सबकी उछेर अलग अलग वतावरन में होती है | यहा तक कि माँ , भाई , बहन ,पिता तक के स्वभाव अलग अलग होते है एक ही परिवार होने के बबावजूद | दुसरी बात यह कि हम किसी का स्वभाव हमारे अनुसार नही बदल सकते | तिसरी बात किसी अन्य द्वारा किए वयव्हार से दुखि होकर हम ख़ुद के साथ अन्याय करते है | हमे सिर्फ़ अपने आप पर ध्यान देना हे की हम सही कर रहे है , हमारी राह सही है , हुमरे कर्म सही है और हम किसी को दुःख नही पहुचा रहे है | तो हम क्यू दुखी हो ? फिर अपने जीवन का मालिक हम दुसरे के व्यव्हार को क्यू बनने दे | हमे तो अपने उपर भरोसा करना हे कि हम सही हे | और साथ ही अगर हम ये समझ ले कि हम किसी को अगर माफ कर देते है तो सबसे बडा फायदा हमे ही होता है कि हमारा मन हल्का रहता है शांत रहता है इसी लिये कहा जाता है कि माफी में बहुत बडी ताकत होती है |                                                          इस सब बातो का सार यहि है कि हम ख़ुद ही हमारे सुख दुःख के , तनाव के , उदासी के मालिक है | वो एसे कि सोच ये रखे कि ” हो सकता है कि किसी को ख़ुद ही कोई परेशानी हो , कोई असंतुश्ट हो अपने आप से , किसी का गुस्सा कंट्रोल में ना हो , या किसी की सोच हमसे बहुत अलग है , तो कोई बात नही मैने माफ किया उन्हें ” | और उनकी गलतियो पे ध्यान ना देकर उनकी कोई अच्छि बात को याद कर ले , एक बार कर के तो देखिये माफ बहुत सुकून मिलेगा | किसी से कोई शिकायत ना रखिए उनकी परिस्थिति अनुसार उनके विचार उनके होंगे , हमे तो सिर्फ़ अपना देखना हे कि हम अच्छा कर रहे है अच्छा ही पाएँगे |                                                                                                                  और लॉ ऑफ़ अट्रेक्शन काम करेगा ” प्यार दो प्यार मिलेगा , नफरत दो नफरत मिलेगी , माफी दो माफी मिलेगी सम्मान दो सम्मान मिलेगा ” ये एक लॉजिकल सत्य है | और हर इंसान किसी अपने के लिए हीरा ही होता है हम किसी को बुरा नही कह सकते | बहुत आसान और असरकारक है ये सोच किताबि बात नही है |                                                                              ये मेरा ख़ुद का अनुभव है तो देर किस बात की अभी इसी पल से ये आजमा कर देखिये …”वाह कितनी प्यारे है सब , मेरे अपने है सब और में ऐसा चुम्बक हूँ प्यार का जो पराये थे वो भी मेरे है अब ” |

Aatmbal

ये 2 साल पहले कि बात हे , प्रिया को पिछ्ले 6 महीनों से मसिक बहुत अधिक आता था और रुकता भी नही था| डॉक्टर को बताने पर पता चला उसे गर्भाशय में मल्टि फोइब्रोइड्स हो गए थे | प्रिया सकारात्मक विचारो वाली थी फिर भी उसके 3-4  दीन रोने में और दुखी रहने में गए क्योंकि डॉक्टर ने बताया कि उसे 15 दिनों में ही गर्भशय निकलवाना पड़ेगा | और दुसरे डॉक्टर ने प्रिया को 3 महीने का वक्त दिया | अचानक से सेहत पे असर , ऊपर से ओप्रेशन के खर्च कि चिंता और कौन दोड भाग करेगा एसे कई विचारों ने उसे कमजोर कर दिया था | परिवार में बेटी थी और कोई था नही सगा संबंधी ऐसा कि जिससे वो अपनी बात शेयर कर सके सथ ही उसके कुछ पारिवारिक सम्स्याए भी चल रही थी |
प्रिया बहुत पोसिटिव विचारो वाली थी एक बार कमजोर पड़ी फिर उसने सोचा 3 महीने हे उसके पास या तो रो के निकाले या हिम्मत से बिमारी को हरा दे | क्या बात थी उसकी …..लग गयी बिमारि को हराने में | उसने सबसे पह्ले अपने आप को सकारात्मक विचर्रो से भरा ” मै ये फोइब्रोइड्स को 3 महीनों में जड़ से मिटा दुंगी बगैर ओपरेशन के और एक मिसाल बनुगी “जैसे विचार वैसे उसे कुदरती मदद मिलने लगी | साथ ही वह इतना जानती थी कि कई लोगो ने केंसर जैसी बिमारिया भी इसी सकारात्म्क्ता से मीटाइ है | एक परिचीत आयुर्वेद् डॉक्टर ने सलाह दी दवा दी प्रिया ने 2 घंटे रोज प्रानायाम , योगसन किए और सिर्फ़ 150 रुपीस कि दवा ली , साथ ही साथ उसने अपने खानपान पर ध्यान दिया , शरीर के चक्र एक्टिएव करना सीखा | अटुट लगन और विश्वास से प्रिया ने मेहनत की रोज खुश रहती ,हंसती जैसे एकदम स्वस्थ हो | अपनी आंतरिक शक्तियों को जाग्रुत किया उसने और एक ही विचार ” एकदम स्वस्थ हूँ मै गर्भाशय एकदम स्वस्थ है मैरा ”
3 महीनों में उसने वो कर बताया सेहत ठीक होने लगी , और 6 महीनों में तो एकदम से ठीक हो गई प्रिया के फोइब्रोइड्स जड़ से मिट गए और अब तो 2 साल हुए प्रिया एकदम स्वस्थ है .एक तरफ साइंस ने भी प्रूफ किया है के हमारे शरीर के सेल्स हमें सुनते है तो जेसे विचार रखेगे वैसे ही शरीर पर असर होती है | साथ ही इंसान के अन्दर शक्तियों का अपार भंडार है , उसे जाग्रुत करना है और स्वयं का आत्म्बल बनाये रखना हे | साथ ही उस महाशक्ति में अटुट श्रद्धा जिसने इंसान को रचा है , ये सब मिलकर ऐसे चमत्कार को संभव कर देते हे |इसी लिए ये कहावत भी है ,,,,,
“मुमकीन नही तो नामुमकीन भी नही कुछ ”                                                                    इक बार ठान लीजिए तो मंजिल को भी मिलना ही हई |